प्रधानमंत्री केयर्स फंड की गलत जानकारी ना दी जाए


 


 


 नई दिल्ली। कोरोना वायरस के चलते भारत समेत दुनियाभर का बुरा हाल है। से लोगों की निकिया व बचाव के लिए प्रधानमंत्री केयर्स फंड में पैसे जुटाए जारी हैजा रहे हैं। ऐसे में बाहर से टा लिया जाने की खबरें। है के बीच सरकार ने साफ किया है। सरकारी सूत्रों ने कहा है कि प्रधानमंत्री केयर्स फंड में में विदेशी चंदे को स्वीकार करने की खबरों से बहुत गलत तरीके से जानकारी दी जा रही है। जो घोषणा की गई है वह यह है कि पीएम केयर फंड केवल उन व्यक्तियों और संगठनों से दान और योगदान स्वीकार करेगा जो विदेशों में आधारित हैं। यह प्रधानमंत्री राष्टीय राहत कोष CARES Fund (पीएमएनआरएफ) के संबंध में भारत की नीति के अनुरूप है। पीएमएनआरएफ को 2011 से सरकारी ट्रस्ट के रूप में विदेशी योगदान भी मिला है। प्राकृतिक आपदाओं के पिछले उदाहरणों के साथ तुलना करने वालों के लिए आधिकारिक बयान में 22 अगस्त 2018 को कहा गया था कि मौजूदा नीति के अनुरूप, सरकार घरेलू प्रयासों के माध्यम से राहत और पुनर्वास की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है ।दुनिया में नौ लाख से ज्यादा लोगों को बीमार कर चुका कोरोना वायरस अब भारत में भी तेजी से पांव पसार रहा है। भारत में कोविड-19 से संक्रमित मरीजों का गुरुवार को आंकड़ा 2000 तक पहुंच गया है। जबकि मरने वालों की संख्या बढ़कर 41 हो गई। देश के विभिन्न हिस्सों में सिर उठा रही कोविड- 19 महामारी से निपटने के लिए सरकार को सहयोग देने के लिए बुधवार को भी सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र के और कंपनियां अपनी तरफ से वित्तीय योगदान और दूसरी तरह के सहयोग की घोषणाओं का सिलसिल जारी रहा। केन्द्र सरकार और कई राज्य सरकारों ने कोरोना वायरस बीमारी के उपचार और परीक्षण सुविधायें उपलब्ध कराने में योगदान के लिए अपने अपने स्तर पर अलग आपात कोष बनाए हैं। देश के दो अग्रणी वित्तीय संस्थानों भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) और जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने प्रधानमंत्री के नागरिक सहायता और आपात स्थिति राहत (पीएम केयर्स) कोष में क्रमश- 100 करोड़ रुपये और 105 करोड़ रुपये का योगदान किया है।